पर्यावरण प्रबंधन पद्धति प्रमाणन

 

            अंतर्राष्‍ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ) विश्‍वभर के संगठनों को उनकी गतिविधियों, उत्‍पादों और सेवाओं के पर्यावरण संबंधी प्रभावों का प्रबंध करने के लिए ढॉंचा और सतत विकास प्राप्‍त करने के लिए सबके लिए एक जैसी अंतर्राष्‍ट्रीय पर्यावरण प्रबंध पद्धति (ईएमएस) बनाना, जो पर्यावरण प्रबंधन के एक साधन के रूप में प्रयुक्‍त हो, के लिए ISO 14000 श्रृंखला के मानकों का प्रकाशन किया है । ISO 14000 आधारभूत मानकों की एक ऐसी विकासशील श्रृंखला है, जिसमें पर्यावरण संबंधी विभिन्‍न क्षेत्र शामिल हैं । ISO 14000 में छह भिन्‍न-भिन्‍न किंतु संबंधित विषयों के बारे मे बताया गया है जैसे पर्यावरण प्रबंध पद्धति (ईएमएस), पर्यावरण ऑडिटिंग (ईए), पर्यावरण निष्‍पादन मूल्‍यांकन (ईपीई), पर्यावरण लेबलिंग (ईएल), जीवन चक्र आकलन (एलसीए) और उत्‍पाद मानकों में पर्यावरण पहलू (ईएपीएस) । इसके साथ ही ये मानक प्रभावी पर्यावरण प्रबंध पद्धति को लागू करने के लिए आवश्‍यक मार्गदर्शन देते हैं ।

 

आवेदकों के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत

प्रस्‍तावना

     

      भारतीय मानक ब्‍यूरो (भा मा ब्‍यूरो) भारत का एक राष्‍ट्रीय मानक निकाय के रूप मे पिछले पॉंच दशकों से अधिक समय से भारतीय उद्योग को राष्‍ट्रीय मानकों के निर्धारण और उत्‍पाद प्रमाणन योजना के प्रचालन से सेवा प्रदान कर रहा है ।

 

      पर्यावरण के प्रति जनता की जागरूकता में वृद्धि होने के कारण IS/ISO 14000 मानकों की श्रृंखला के अनुसार भा मा ब्‍यूरो ने पर्यावरण प्रबंध पद्धति (ईएमएस) प्रमाणन आरंभ किया है, जो किसी संगठन की प्रक्रिया में निर्णय लेने के लिए महत्‍वपूर्ण तत्‍व बन गया है । ये मानक पर्यावरण प्रबंध पद्धति पर अन्‍तर्राष्‍ट्रीय रूप से स्‍वीकृत ISO 14000 मानको की श्रृंखला के अधिग्रहण और समान है ।

 

      इस योजना में IS/ISO 14001 के अनुसार पर्यावरण प्रबंध पद्धति प्रमाणन लाइसेंस की स्‍वीकृति दी जाती है जो ISO 14001:1996 के समान है ।

 

ISO 14001:1996 पर्यावरण प्रबंध पद्धति उपयोग के लिए मार्गदर्शन सहित विशिष्टि

 

     ISO 14001:1996 कार्यान्‍वन किया जाना चाहिए, जिससे कानूनी और नियामक अपेक्षओं के अनुपालन/अनुरूपता, पर्यावरण निष्‍पादन में सतत सुधार के लिए संगठन की क्षमता का पता चल सके । यह मानक संगठन को आवधिक पुनर्विचार और पर्यावरण प्रबंध पद्धति (ईएमएस) के मूल्‍यांकन के लिए उत्‍साहित करता है जिससे सुधार और उनके कार्यान्‍वन के अवसरों की पहचान हो सके । यह पद्धति आधारित मानक है, जो किसी संगठन को उसके पर्यावरण प्रभाव/मुद्दे के प्रबंध के लिए ब्‍लू-प्रिंट देता है ।

 

      ईएमएस सतत सुधार की प्राप्ति के लिए ढांचागत प्रक्रिया प्रदान करता है, जिसकी  दर और सीमा संगठन के द्वारा सामाजिक-आर्थिक और अन्‍य परिस्थितियों के प्रकाश मे निर्धारित किया जा सकता है ।

     

समग्र प्रबंध पद्धति सहित पर्यावरण विषयों का एकीकरण पर्यावरण प्रबंध पद्धति के प्रभावी कार्यान्‍वन में सहयोग देता है ।

 

प्रमाणन कैसे प्राप्‍त करें

 

आवेदन पत्र और उसकी प्रक्रिया

 

वह संगठन जो IS/ISO 14001 के अनुसार पर्यावरण प्रबंध पद्धति (ईएमएस) के लिए लाइसेंस प्राप्‍त करना चाहता है, उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे इस मानक के अनुसार ईएमएस का प्रचालन कर रहे हैं । संगठन को भा मा ब्‍यूरो के निकटतम क्षेत्रीय कार्यालय में निर्धारित आवेदन शुल्‍क, जैसा लागू हो, सहित तिहरे (फार्म IV) में निर्धारित प्रोफार्मा पर आवेदन करना चाहिए । प्रत्‍येक आवेदन पत्र के साथ प्रलेखित पर्यावरण प्रबंध पद्धति ( जैसे पर्यावरण मैनुअल आदि) के साथ पूरक प्रश्‍नावली (फार्म VII) आवश्‍यक है । शुल्‍क की सूची निम्‍नलिखित अनुसार है। आवेदन पत्र अहस्‍तांतरणीय है। कृपया आवेदक पत्र और प्रश्‍नावली उपमहानिदेशक (अपने क्षेत्र) को भेंजे ।

     

आवेदन पत्र में संगठन के मालिक, भागीदार अथवा मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अथवा संगठन की तरफ से कोई अन्‍य व्‍यक्ति जिसे हस्‍ताक्षर करने का प्राधिकार दिया हो, हस्‍ताक्षर होने चाहिए । आवेदन पत्र में हस्‍ताक्षर करने वाले व्‍यक्ति के नाम और पदनाम आवेदन-पत्र में दिए खाली जगह में स्पष्‍ट रूप से लिखे जाने चाहिए । लाइसेंसधारी नवीकरण आवेदन पत्र  को इस वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं ।

 

पर्यावरण प्रबंध पद्धति प्रमाणन की प्रक्रिया

 

 

IS/ISO 14001 के लिए पर्यावरण प्रबंध पद्धति प्रमाणन के लिए शुल्‍क की अनुसूची

(आवेदक/लाइसेंसधारी द्वारा सभी शुल्‍क पर 8% सेवा कर अग्रिम देय होगा)

 

आवेदन शुल्‍क

 

आवेदन पत्र के साथ आवेदन शुल्‍क 15000-/ रूपये (लघु उद्योग इकाइयों और IS/ISO 14001:2000 मानक के लिए भा मा ब्‍यूरो द्वारा प्रमाणित फर्म के लिए 10000/- रूपये) जिसमें प्रलेखित पर्यावरण पद्धति के लिए ऑडिट और ऑडिट पूर्व शुल्‍क शामिल है । फिर भी ऑडिट पूर्व के दौरान ऑडिटर (रों) की यात्रा/रहने का व्‍यय की लागत अलग से होगी ।

आकलन शुल्‍क (प्रमाणन ऑडिट) और पुन: आकलन शुल्‍क (नवीकरण ऑडिट)

 

आकलन/पुन: आकलन के लिए प्रति ऑडिटर प्रति दिन के हिसाब से 5000/- रूपये के साथ ऑडिटर की यात्रा/रहने का व्‍यय लिया जाएगा । सामान्‍यतया आकलन का समय छह से नौ श्रमदिवस होगे (उदाहरणार्थ तीन ऑडिटर दो दिनों के लिए अथवा तीन ऑडिटर तीन दिनों के लिए) , यद्यपि यह कम्‍पनी के साइज और प्रचालन की प्रगति पर निर्भर करता है (आकलन शुल्‍क और अनुमानित व्‍यय ऑडिट से पूर्व अग्रिम देना होगा)

 

लाइसेंस शुल्‍क (स्‍वीकृत/नवीकरण)

 

लाइसेंस शुल्‍क तीन वर्षों के लिए 60,000/- रूपये होगी (लघु उद्योग इकाई और IS/ISO 9001:2000 मानक के लिए प्रमाणित फर्म के लिए 40,000/- रूपये होगी) ! लाइसेंसधारी का लाइसेंस प्रलेख देने से पहले लाइसेंस स्‍वीकृति के समय शुल्‍क का भुगतान करना होगा ।

 

निगरानी ऑडिट शुल्‍क

 

तीन वर्षों में कम से कम तीन निगरानी ऑडिट किए जाएंगे । निगरानी ऑडिट के लिए जितने श्रमदिवस लगेंगे, उस हिसाब से प्रति श्रमदिवस 5000/- रूपये के साथ ऑडिटर की यात्रा और रहने का व्‍यय लिया जाएगा (निगरानी शुल्‍क ऑडिट और अनुमानित व्‍यय ऑडिट से पहले अग्रिम भुगतान किया जाऐगा)

 

विशेष दौरे का शुल्‍क

 

किसी अन्‍य ऑडिट (अनुवर्तन ऑडिट)  या विशेष दौरे के लिए 5000/- रूपये प्रति ऑडिटर प्रति दिन के साथ ऑडिटरों की यात्रा और रहने का व्‍यय भी लिया जाएगा । उपरोक्‍त व्‍यय में अतिरिक्‍त अपेक्षाओं को शामिल करते हुए किसी अन्‍य दौरे के लिए भी उगाही होंगे, जो अपालन (असंतोषजनक निष्‍पादन) से उत्‍पन्‍न कार्रवाई के सत्‍यापन के लिए अपेक्षित नियमित दौरे और/अथवा दौरों के दौरान आकलन नहीं किया गया ।  विशेष दौरे में ऑडिटी के अनुरोध पर विषय क्षेत्र के विस्‍तार, संरचना के परिवर्तन, विलयन, पते में परिवर्तन आदि को भी शामिल किया जाएगा । भा मा ब्‍यूरो विशेष दौरे के आयोजन के बारे में निर्णय लेगा ।

शुल्‍क पर पुर्नविचार

शुल्‍क और रियायत पर आवधिक पुर्नविचार होगा ।

ऑडिट के लिए उप-संविदाकार ऑडिटर और तकनीकी विशेषज्ञ के चयन का मापदंड

भा मा ब्‍यूरो अधिनियम 1986 और उसके अन्‍तर्गत बने नियमों और विनियमों के प्रावधानो के अन्‍तर्गत, भारतीय मानक ब्‍यूरो विभिन्‍न प्रबन्‍धन  पद्धति प्रमाणन योजनाओं IS/ISO 9001 (गुणता प्रबन्‍धन  पद्धति)