खाद्यजनित हानि विश्‍लेषण और क्रांतिक नियंत्रण बिन्‍दु (एचएसीसीपी)

 

      एचएसीसीपी खाद्य उत्‍पादन में जीवाणु संबंधी तथा अन्‍य खाद्यजनित हानि का पता लगाने तथा उनसे बचाव करने के लिए अभिकल्पित एक प्रक्रिया नियंत्रण पद्धति है। इसमें समस्‍याओं के घटने से पहले उन्‍हें रोकने तथा विपथनों का पता चलते ही उनमें सुधार करने के लिए अभिकल्पित चरण शामिल हैं। प्रलेखन एवं सत्‍यापन युक्‍त ऐसी निवारण प्रणाली को वैज्ञानिक प्राधिकारियों एवं अंतरराष्‍ट्रीय संगठनों द्वारा सुरक्षित भोजन के उत्‍पादन के लिए उपलब्‍ध सर्वाधिक प्रभावी दृष्टिकोण के रूप में व्‍यापक मान्‍यता दी गई है।

 

      एचएसीसीपी में खाद्यजनित हानि को अभिज्ञात करने, प्रत्‍येक चरण के दौरान जोखिमों के घटित होने के अवसरों का विश्‍लेषण करने, कच्‍चे माल की अधिप्राप्ति, विनिर्माण, वितरण, खाद्य उत्‍पादों के प्रयोग तथा खाद्य‍जनित हानि नियंत्रण के लिए उपायों को परिभाषित करने में एक पद्धतिबद्ध दृष्टिकोण शामिल है। ऐसा करने में, निरीक्षण दृष्टिकोण में प्रवृत्‍त अनेक कमियां बताई जाती हैं तथा एचएसीसीपी केवल जीवाणु संबंधी परीक्षण के पश्‍चात ही कमियों को दूर करता है।

 

     एचएसीसीपी खाद्य उत्‍पादों के उत्‍पादकों, संसाधकों, वितरकों, निर्यातकों इत्‍यादि को खाद्य सुरक्षा आश्‍वस्‍त करने में कुशल एवं लागत प्रभावी तरीके से तकनीकी संसाधनों का प्रयोग करने में समर्थ बनाते हैं। खाद्य निरीक्षण भी अधिक पद्धतिबद्ध तथा इसलिए समस्‍यामुक्‍त होगा। इसमें नि:स्‍संदेह आरंभ में कुछ अतिरिक्‍त वित्‍त साधनों का नियोजन अंतर्ग्रस्‍त होगा किन्‍तु सतत रूप से बेहतर गुणता एवं इसी कारण बेहतर मूल्‍यों तथा प्रतिफलों के माध्‍यम से इसकी कहीं अधिक प्रतिपूर्ति हो जाएगी।

 

एचएसीसीपी प्रमाणन

 

      भा मा ब्‍यूरो खाद्य उद्योग को दो प्रमाणन योजनाएं प्रस्‍तावित करता है :-

 

i)                   आईएस 15000 : 1998 के प्रति एचएसीसीपी स्‍टैंड-एलोन प्रमाणन

 

ii)                 एचएसीसीपी आधारित गुणता पद्धति प्रमाणन में आईएस/आईएसओ 9000 के प्रति गुणता पद्धति का लेखापरीक्षा प्रमाणन तथा आईएस : 15000:1998 के प्रति एचएसीसीपी प्रमाणन के जरिए दो प्रमाणनों की व्‍यवस्‍था की गई है।

 

 

लाइसेंस कैसे प्राप्‍त किया जाए ?

 

एक प्रलेखित गुणता पद्धति तथा/अथवा एचएसीसीपी कार्यान्‍वयन योजना की स्‍थापना करें तथा इसकी प्रभावत्‍मकता सुनिश्चित करें।

 

प्रश्‍नावली (प्रपत्र XII) तथा आवश्‍यक शुल्‍क के साथ निर्धारित प्रोफार्मा (प्रपद्ध IV)  में आवेदन पत्र उप-महानिदेशक (संबंधित क्षेत्र के) को प्रस्‍तुत करें।

 

पूछे जाने पर गुणता संहिता तथा/अन्‍य संबंधित दस्‍तावेज प्रस्‍तुत करें।

 

भा मा ब्‍यूरो आकलन दल द्वारा लेखापरीक्षा की व्‍यवस्‍था करें।

 

आकलन दल द्वारा अवलोकित असमरूपताओं पर कार्रवाई करें तथा उन्‍हें सत्‍यापित करवाएं।

 

संतोषजनक पाए जाने पर लाइसेंस प्रदान किए जाने की अनुशंसा की जाती है।

 

लाइसेंस प्राप्‍त करें !!!

 

लाइसेंस कंपनी को राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय बाजारों में प्रभावी ढंग से प्रतिस्‍पर्धा करने में समर्थ बनाएगा।

 

 

एचएसीसीपी प्रमाणन की प्रक्रिया

 

गुणता प्रबंधन पद्धति के साथ एकीकृत एचएसीसीपी प्रमाणन

 

(आवेदकों/लाइसेंसधारकों द्वारा अदा किए जाने वाले सभी शुल्‍कों पर यथा प्रयोज्‍य सेवाकर अग्रिम जमा किया जाएगा)

 

आवेदन शुल्‍क

 

आईएस 15000 (एचएसीसीपी स्‍टैंड एलोन) अथवा आईएस/आईएसओ 9001 के साथ एकीकृत आईएस 15000 : आवेदन शुल्‍क (आवेदनपत्र के साथ अदा किया जाना है) 15,000 रूपए होगा।

 

निम्‍न को आवेदन शुल्‍क में रियायत दी जाएगी :-

 

भारतीय मानक ब्‍यूरो द्वारा किसी भी प्रबंधन पद्धति के लिए पहले से प्रमाणित कोई इकाई आवेदन शुल्‍क 10,000/- रूपए होगा।

 

 

 

(* डीसीएसएसआई, लघु उद्योग मंत्रालय, कृषि एवं ग्रामीण उद्योग, भारत सरकार द्वारा लघु उद्योगों एवं अन्‍य इकाइयों के पंजीकरण के लिए निर्धारित पात्रता कसौटी के अनुसार)

 

लघु उद्यम एक करोड़ रूपए से कम की पुंजी (अचल परिसंपत्तियां + निवल चालू परिसम्‍पत्तियां) नियोजित करने वाली तथा 25 से कम कर्मचारियों वाली कोई इकाई आवेदन शुल्‍क 10,000/- रूपए होगा ।

 

किसी संगठन या निगमित निकाय के भारतीय मानक ब्‍यूरो द्वारा किसी प्रबंधन पद्धति के लिए प्रमाणित प्रथम इकाई की प्रत्‍येक अनुवर्ती इकाई आवेदन शुल्‍क 10,000/- रूपए होगा (नीचे टिप्‍पणी देखें)

 

टिप्‍पणी :- उपर्युक्‍त तब प्रयोज्‍य है यदि प्रथम इकाई से पहले ही आवेदनशुल्‍क के रूप में 15000/- रूपए प्रभारित किए गए हों। तथापि, यदि संगठन या निगमित निकाय की पहली इकाई को पहले ही आवेदन शुल्‍क  में रियायत दी गई हो अर्थात 10000/- रूपए प्रभारित किए गए हों तो सभी अनुवर्ती इकाइयों, जो उपर्युक्‍त किसी भी श्रेणी में रियायत के लिए पात्र है (`निम्‍न के लिए आवेदन शुल्‍क में रियायत के तहत यथा उल्लिखित’), से आवेदन शुल्‍क के रूप में 15000/- रूपए प्रभारित किए जाएंगे। तत्‍पश्‍चात् अर्थात जब एक इकाई से पहले ही आवेदनशुल्‍क के रूप में 15000/- रूपए प्रभारित कर लिए गए हों, सभी अनुवर्ती इकाइयों से आवेदन शुल्‍क के रूप में 10000/- रूपए प्रभारित किए जाएंगे।

 

      समूह रियायत के लिए (एक समूह में लाइसेंस के लिए आवेदन कर रहे एक संगठन के यूनिट) संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय से या मुख्‍यालय, नई दिल्‍ली में एमएससीडी से संपर्क करें।

 

पर्याप्‍तता एवं प्रारंभिक दौरा

 

      आवेदन शुल्‍क में प्रलेखित एचएसीसीपी स्‍टैंड एलोन अथवा गुणता प्रबंधन पद्धति के साथ एकीकृत एचएसीसीपी के लिए आवेदन शुल्‍क तथा प्रारंभिक दौरा शुल्‍क शामिल है। तथापि, प्रारंभिक दौरे के लिए लेखापरीक्षक (कों) की यात्रा तथा रहने के खर्च लागत पर प्रभारित किए जाएंगे।

 

आकलन शुल्‍क (प्रमाणन शुल्‍क) तथा पुन: आकलन (नवीकरण लेखापरीक्षा) शुल्‍क

 

      आकलन/पुन: आकलन शुल्‍क के लिए प्रति लेखापरीक्षक प्रतिदिन 3000/- रूपए जमा लेखापरीक्षकों की यात्रा/रहने के लिए खर्च जिसे लागत पर प्रभारित किया जाएगा। सामान्‍यत: आकलन/पुन: आकलन समय छ: से नौ श्रम दिवस का होगा (उदाहरणार्थ तीन लेखापरीक्षक दो दिन के लिए अ