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उत्पाद
प्रमाणन योजना BIS उत्पाद
प्रमाणन योजना
मूलत: स्वैच्छिक
है और इसका उद्देश्य
ग्राहक को गुणता, सुरक्षा
और विश्वसनीयता
प्रदान करना है
। किसी उत्पाद
पर प्रमाणन चिन्ह
जिसे मानक मुहर
के नाम से जाना
जाता है की उपस्थिति
विशिष्टि
के अनुरूप आश्वासन
का होना है । फैक्टरी
और मार्किट
दोनों जगह से लिए
गए नमूनों के अचानक
निरीक्षण और परीक्षण
द्वारा लाइसेंसधारी
की कार्यकारिता
पर नियमित निगरानी
से अनुरूपता सुनिश्चित
की जाती है । परिचय भारतीय
मानक ब्यूरो
को भारतीय संसद
के द्वारा पारित
विधान जिसे भारतीय
मानक ब्यूरो
अधिनियम 1986 के नाम
से जाना जाता है, द्वारा
प्रदत शक्ति
से उत्पाद
प्रमाणन
योजना चला रहा
है और अब तक निर्माताओं
को 30000 से अधिक लाइसेंस
स्वीकृत किए
जा चुके हैं, जिसमें
औद्योगिक
क्षेत्र के विभिन्न
प्रकार कृषि, वस्त्रादि और
इलैक्ट्रॉनिक
विषयों के लाइसेंस
तक शामिल है । लाइसेंसधारी
को प्रमाणन से
प्रचलित मुहर के
उपयोग की स्वीकृति
मिल जाती है, जो
पिछले 50 वर्षों
से अधिक समय से
भारतीय और निकटवर्ती
मार्किट में
गुणता उत्पाद
का पर्याय बन गयी
है । ब्यूरो की
पूर्ववर्ती संस्था
भारतीय मानक संस्था
में उत्पाद प्रमाणन
योजना 1955 से आरंभ
हुई थी। वर्तमान
में 1100 उत्पादों
को शामिल करते
हुए 17000 से अधिक लाइसेंस
प्रचालन में है
। प्रमाणन पद्धति
भा
मा ब्यूरो उत्पाद
प्रमाणन योजना
वास्तव में स्वैच्छिक
है और यह अधिकांशत: ISO मार्गदर्शिका
28 पर आधारित है, यह
मार्गदर्शिका
प्रारंभिक परीक्षण
एवं फैक्टरी
की गुणता प्रबध पद्धति
के मूल्यांकन
के जरिए उत्पाद
मानकों की
अनुरूपता को निर्धारित
व स्वीकृत करती
है, यह
स्वीकृति फैक्टरी
के गुणता प्रबंध
पद्धति की निगरानी
व फैक्टरी एवं
बाजार से लिए गए
नमूनों के परीक्षण
के बाद ही दी जाती
है। सभी भा मा ब्यूरो
प्रमाणन भारतीय
मानकों के
अनुसार किए जातें हैं, जो
उत्पाद प्रमाणन
के अधीन पाए जातें है ।
भारतीय मानकों
की बड़ी संख्या
ISO/IEC मानकों के
समान है और कुछ
मानकों को
IS/ISO अथवा
IS/IEC मानकों के
अनुसार दोहरी
संख्या दी गई
है । भा
मा ब्यूरो उत्पाद
प्रमाणन योजना
के बड़ी संख्या
मे प्रचालन
घटक ISO मार्गदर्शिका
65 की अपेक्षाओं
के अनुरूप है । लाइसेंसो के प्रकार यद्यपि
स्वत: यह योजना
स्वैच्छिक लाइसेंस प्रदान करने
के लिए है, तथापि
भारत सरकार ने
जनता के स्वास्थ्य
तथा उसकी सुरक्षा
और व्यापक खपत
के उत्पादों
को ध्यान में
रखते हुए विभिन्न
अधिनियमों के
अंतर्गत समय समय पर जारी
किए गए आदेशों
द्वारा विभिन्न
उत्पादों के
लिए अनिवार्य
प्रमाणन लागू
किया है । जहॉं
सवैच्छिक
प्रमाणन के अन्तर्गत
केवल ब्यूरो
को आवेदन करने
पर ही लाइसेंस
प्रदान किया जाता
है, अनिवार्य
प्रमाणन अधिसूचित
प्राधिकरणों
द्वारा लागू किया
जाता है । इस प्रलेख
मे बाद में
उन मदों की
सूची दी गई है जिन्हें
अनिवार्य प्रमाणन
के अन्तर्गत
लाया गया है तथा
अनुरूप भारतीय
मानकों की
संख्या और आदेशों
को लागू करने के
लिए उत्तरदायी
प्राधिकारी दिए
हैं। कुछ
उत्पादों को
वैधानिक ऐजेसियों
के साथ विशेष प्रबन्ध के
अन्तर्गत विशेष प्रमाणन
योजना के अन्तर्गत
रखा गया है, जिसके
लॉट अथवा बैच का निरीक्षण
भा मा ब्यूरो
के निरीक्षण अधिकारियों
द्वारा किया जाता
है । बड़ी संख्या
में गैस सिलिंडर और
वाल्व का
प्रमाणन इस योजना
के अन्तर्गत
है । यूनीसेफ
के साथ समझौते
के अन्तर्गत, गहराई
से पानी निकालने
के हथबरमों
जो ग्रामीण क्षेत्रों
के लिए क्रांतिक
पेय जल पूर्ति
का स्त्रोत
है, को
लॉट निरीक्षण
योजना के अन्तर्गत
रखा गया है । अन्य
सभी उत्पादों
के लिए विनिर्माता
द्वारा स्वयं
प्रमाणन के आधार
पर कार्य करती
है, जिस
उत्पाद के लिए
लाइसेंस दिया
गया है, उसकी संबंधित
मानक के प्रति
अनुरूपता सुनिश्चित
की जाती है । अपनी
निगरानी द्वारा
ब्यूरो प्रमाणित
वस्तुओं
की गुणता पर
पेनी नजर रखता
है । कुछ विशिष्ट
क्षेत्रों में
सक्षम ऐजेंसियों
को प्रमाणन निगरानी
गतिविधियों
में उप-संविदा
के लिए प्रावधान विद्यमान
है । वर्तमान में
कुछ इस्पात उत्पाद, रबड़ उत्पाद
और इलैक्ट्रानिक
उत्पाद इस प्रकार
की निगरानी प्रबन्ध के
अन्तर्गत
है । प्रचालन के क्षेत्र भा मा ब्यूरो
की उत्पाद प्रमाणन
योजना बिना किसी
भेदभाव के सभी
देशों के विनिर्माताओं
के लिए है । लाइसेंस
उस किसी भी भारतीय
मानक के लिए दिया
जा सकता है, जिसमें
ऐसे प्रमाणन का
प्रावधान
है । मोटे तौर पर
इस समय प्रौद्योगिकी
के निम्नलिखित
क्षेत्र प्रमाणन
के अंतर्गत है
: - वस्त्रादि - रासायनिक
पदार्थ तथा कीटनाशी - रबड़ और प्लास्टिक
उत्पाद - सीमेंट और
कंक्रीट उत्पाद - मूल
धातु और धातु से
बने उत्पाद - मशीनरी
और उपकरण - विद्युतीय, इलैक्ट्रानी और
प्रकाशीय
उपकरण - मोटर
गाडि़यों
के पुर्जे - कृषि, खाद्य, पेय
पदार्थ तथ तम्बाकू - चमड़े
के उत्पाद - लकड़ी
के उत्पाद - कागज
और लुगदी से बने
उत्पाद - परीक्षण
उपकरण - भवन-निर्माण
सामग्री - नल
द्वारा पानी निकालने, सिंचाई
करने, जल-निकास और
मल-जल के उपकरण 1. लाइसेंस की स्वीकृति
के लिए आवेदन – पत्र भा मा ब्यूरो
प्रमाणन मुहर
लाइसेंस की प्रक्रिया
लाइसेंस प्राप्ति
के लिए इच्छुक
विनिर्माता द्वारा
निर्धारित आवेदनपत्र
(फार्म
I) में
आवेदन पत्र भरने
के साथ आरंभ हो
जाती है । फार्म
आवेदन शुल्क
1000 रू. के साथ शाखा
कार्यालय में
जमा करवा दिया
जाता है जो निर्माण
इकाई के क्षेत्राधिकार
में स्थित है ।
विदेशी आवेदनकर्ता
सीधे ही आवेदन-पत्र
`निदेशक, केन्द्रीय
मुहरांकन
विभाग’ भा मा ब्यूरो
मुख्यालय, नई
दिल्ली को भेज
सकते हैं । अधिक
जानकारी के लिए
कृपया भा मा ब्यूरो
विदेशी निर्माता
योजना को देखें
। आवेदन
पत्र के साथ निम्नलिखित
अतिरिक्त प्रलेख
भेजने आवश्यक
है : क) फैक्टरी
की जगह का नक्शा
और फैक्टरी लेआउट ख) निर्माता
के परिसर को प्रमाणित
करने वाला प्रलेख ग) उपलब्ध निर्माण
करने के उपस्कर
और परीक्षण सुविधाओं की
सूची घ) लाइसेंस की
स्वीकृति के
बाद भा मा ब्यूरो
द्वारा अनुमोदित
योजना का पालन
करने के लिए वचनबद्धता
के साथ परीक्षण
और निरीक्षण में
प्रयुक्त होने वाली
योजना ड़) लाइसेंस
की स्वीकृति
की दिनांक से निर्धारित
मुहरांकन
शुल्क के भुगतान
की वचनबद्धता च)
लाइसेंस
की स्वीकृति
की सभी शर्तों
के अनुपालन की
वचनबद्धता और
लाइसेंस के निलंबन
अथवा रद्द होने
की स्थिति में
तत्काल मुहरांकन
निलंबित करने
की वचनबद्धता
। छ)
उत्पादन
और निरीक्षण की
अवस्थाओं
के क्रम को बताने
वाला फ्लो
चार्ट ज)
उपलब्ध
तकनीकी कार्मिको
का विवरण 2.
रिकार्डिंग 2.1 अगर जॉंच
करने पर आवेदन-पत्र
पूरी तरह से ठीक
पाया जाता है, तो
इसे रिकार्ड
कर लिया जाता है
और आवेदन संख्या
दे दी जाती है ।
आवेदन की पावती
भेज दी जाती है
और भविष्य में
संदर्भ के लिए
आवेदक को संख्या
भेज दी जाती है
। 3.
प्रारम्भिक
निरीक्षण 3.1 यूनिट का
प्रारम्भिक
निरीक्षण पारस्परिक
सहमति के आधार
पर तय दिनांक को
किया जाता है, जो
पंजीकरण के एक
महीने के अन्दर
होना चाहिए । इस निरीक्षण
के दौरान फर्म
के निर्माण करने
की योग्यता और
नियंत्रण तकनीकें, उपलब्ध
सुविधाऍं
और कार्मिको
की तकनीकी दक्षता
का मूल्यांकन
किया जाता है ।
उत्पाद के नमूनों
का परीक्षण किया
जाता है और भा मा
ब्यूरो तथा मान्यता
प्राप्त प्रयोगशालाओं
में परीक्षण के
लिए भी नमूने लिए
जाते हैं । 3.2 पहले दौरे
के लिए आवेदक से
4000/- रू. प्रतिदिन
की दर से प्रारम्भिक
दौरे के लिए व्यय
लिया जाता है और
बाद के दौरों के
लिए 3000/- रू. प्रतिदिन
की दर से लिए जाते
हैं । आवेदक परीक्षण
शुल्क का भुगतान
प्रयोगशाला की
दरों की अनुसूची
के अनुसार करता
है । 3.3
प्रारम्भिक
निरीक्षण के दौरान
आवेदक के प्रबन्धन
से परीक्षण् और निरीक्षण
की योजना पर विचार-विमर्श
किया जाए । और
अधिक जानकारी
के लिए कृपया निदेशक (केन्द्रीय
मार्क्स) को निम्न
पते पर सम्पर्क
करें । भारतीय
मानक ब्यूरो, मानक
भवन ,9, बहादुरशाह
जफर मार्ग,
नई दिल्ली-110002 | |
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